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कान के लिठयोग – सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की शकà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के उपाय
पिछले कà¥à¤› वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में योगासन का वैशà¥à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° पर अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है। बाबा रामदेव ने इस कला में लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ हासिल की है और योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ को विशà¥à¤µ मंच पर ला खड़ा किया है। बीमारी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ या à¤à¤• विशेष आसन का चयन किया जाता है और पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• आसन शरीर के à¤à¤• विशेष à¤à¤¾à¤— को मदद करता है। इसी पà¥à¤°à¤•ार कान के लिठयोग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ à¤à¥€ हैं। कान के लिठयोग हमारा बहरापन दूर करता है और कान समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से आराम दिलाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ कान के लिठयोग बहरापन दूर करता है?
योगासन बहरापन का à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक इलाज है। नीचे दिठगठआसन बहà¥à¤¤ फायदेमंद हैं और बहरेपन के इलाज में निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से मदद करेंगे। योगासन बहरेपन पर काबू पाने में मदद करेंगे। कान की दवा और कान की मशीन पर निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ को à¤à¥€ कम करेंगे। नियमित योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ आपके बहरेपन को बढ़ने से रोक सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ योग संवेदी बहरापन के लिठमदद कर सकता है?
योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ या आसन निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से संवेदी या सेंसेरिनà¥à¤¯à¥‚रल बहरेपन के लिठमदद कर सकते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार का बहरापन बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— या 50 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के लोगो को अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह आयॠसे संबंधित है और कमजोरी या शà¥à¤°à¤µà¤£ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ या कान की कमजोर नसों के कारण होता है। ये नसें हमारे मसà¥à¤¤à¤• में सà¥à¤ªà¥€à¤š या धà¥à¤µà¤¨à¤¿ संकेत को पहà¥à¤‚चाती हैं। योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ या आसन, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के लिठसंकेत ले जाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करने के लिà¤, नसों को फिर से जीवंत करने में मदद करेंगे।
1. à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® – कान के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤®
शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लेने के लिठवà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® या आसन को पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कहा जाता है, अलग-अलग तरह के पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® आसन होते हैं। à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® या मधà¥à¤®à¤•à¥à¤–ी शà¥à¤µà¤¾à¤¸ की सिफारिश कान की कमजोर नसों का इलाज है। à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤°à¥€ शबà¥à¤¦ हिंदी शबà¥à¤¦ à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤° या à¤à¤à¤µà¤°à¤¾ से लिया गया है जिसका अरà¥à¤¥ है मधà¥à¤®à¤•à¥à¤–ी। यह अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ विशेष रूप से कान, नाक और गले के लिठहै। वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® के दौरान शà¥à¤µà¤¾à¤¸ छोड़ते समय मधà¥à¤®à¤•à¥à¤–ी की à¤à¤¿à¤¨à¤à¤¿à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ के समान आवाज आती है। यह कानों में à¤à¤• गूंज पैदा करती है और खोपड़ी à¤à¥€ गूंजती है और बाल कोशिकाओं को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करता है जो धà¥à¤µà¤¨à¤¿ संकेतों को विदà¥à¤¯à¥à¤¤ आवेगों में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ करने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। इन बाल कोशिकाओं की कमजोरी संवेदी या सेंसरोरियल बहरापन का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण है।
à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤°à¥€ कान के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® के चरणों के लिठइस वीडियो को देखें।
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को लगà¤à¤— 5 से 7 बार दोहराà¤à¤‚।
यह साइनस और अवरà¥à¤¦à¥à¤§ कानों को मà¥à¤•à¥à¤¤ करेगा और कान के कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करेगा।
आलती पालती मार कर या पदà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¨ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में बैठें
अपनी आà¤à¤–ें बंद रखें
अपनी तरà¥à¤œà¤¨à¥€ उंगली या अंगूठे का उपयोग करके कान की लोलकियों को मोड़कर अपने कान बंद करें। (बहà¥à¤¤ जोर से ना दबायें)
गहराई से शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लें, अपना मà¥à¤‚ह बंद रखें और अपनी नाक के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤¿à¤¨à¤à¤¿à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ या ॠकी आवाज करते हà¥à¤ शà¥à¤µà¤¾à¤¸ छोड़ें
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को 5 से 7 बार दोहराà¤à¤‚
यह साइनस (Sinus) और कानों को अवरà¥à¤¦à¥à¤§ मà¥à¤•à¥à¤¤ कर देगा और कान के हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करेगा।
2. कान के लिठयोग – मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ या मछली मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾
उमà¥à¤° के कारण, सिर और कान के हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿ में कमी आती है, उमà¥à¤° से संबंधित गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के कारण कशेरà¥à¤•ा धमनी का संपीड़न होना à¤à¥€ कारणों में से à¤à¤• है। वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® जो गरà¥à¤¦à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से कठोरता को मà¥à¤•à¥à¤¤ या कम करके रकà¥à¤¤ आपूरà¥à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करने में मदद करते हैं, उनसे शà¥à¤°à¤µà¤£ शकà¥à¤¤à¤¿ में काफी अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤§à¤¾à¤° होगा।यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ शीरà¥à¤·à¤¾à¤¸à¤¨ या सिर के बल खड़ा होना और सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गासन या कनà¥à¤§à¥‹à¤‚ के बल खड़ा होना सिर में बेहतर रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ के लिठसबसे अचà¥à¤›à¤¾ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ माना जाता है। मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने के लिठआसान है।
कान के लिठयोगासन मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¸à¤¨ या मछली मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के लिठयह वीडियो देखें।
मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ या मछली मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾
योग बड़े पैमाने पर पà¥à¤°à¤•ृति से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ लेता है, अधिकांश आसनों के नाम जानवरों और अनà¥à¤¯ वनà¥à¤¯à¤œà¥€à¤µà¥‹à¤‚ के नाम पर रखे गठहैं।
मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ गरà¥à¤¦à¤¨ के पीछे की मांसपेशियों और ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ को मजबूत करता है, यह गले और ऊपरी गरà¥à¤¦à¤¨ के उपरी à¤à¤¾à¤— को à¤à¥€ फैलाता है।
यदि उपरà¥à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ कठिन है, तो नीचे दिखाठगठचितà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤°, आसान मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के साथ कोई à¤à¥€ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ कर सकता है।
आसान मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ या मछली मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ blog imageआसान मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¨ या मछली मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾
कान के लिठयोग – मतà¥à¤¸à¥à¤¯à¤¸à¤¨ योग अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ के आसान कदम।
अपने हाथों को अपनी तरफ करके पीठके बल लेट जाà¤à¤‚।
सहारे के लिà¤, हथेलियों को नीचे करके अपने हाथों को कमर के नीचे रखें, गहराई से शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लें और धीरे-धीरे अपने सिर और छाती को उठाà¤à¤‚।
à¤à¤• ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बनाठरखें और अपने सिर को पीछे की तरफ नीचे करते हà¥à¤ जमीन को छूने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
कोहनियों पर वजन देते हà¥à¤¯à¥‡ अपनी छाती को उठाà¤à¤‚ तथा शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लें और छोड़ें। शà¥à¤µà¤¾à¤¸ छोड़ते समय रिलैकà¥à¤¸ हो जाà¤à¤‚ और जब शà¥à¤µà¤¾à¤¸ को à¤à¥€à¤¤à¤° लें तो अपने शरीर को ठोस बनाà¤à¤‚। जब तक आप आरामदायक महसूस करें, तब तक इसे करें।
समापà¥à¤¤ करते समय, धीरे-धीरे सिर को ऊपर लाà¤à¤‚ और सीने को नीचे करें, अपने हाथों को वापस शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में ले आयें।
कान के लिठयोग – शूनà¥à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾
योग आसन के अलावा, मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤à¤ à¤à¥€ योगिक उपचार पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ हैं।
शà¥à¤¨à¥à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ का अरà¥à¤¥ संसà¥à¤•ृत में शूनà¥à¤¯ या आकाश के रूप में किया जाता है जिसे आकाश मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ कहा जाता है, यह मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ अपने à¤à¥€à¤¤à¤° के अंतरिकà¥à¤· से संबंधित है।
मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤“ं के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 5 उंगलियां इस बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड के 5 ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करती हैं, ये ततà¥à¤µ अगà¥à¤¨à¤¿, वायà¥, अंतरिकà¥à¤·, पृथà¥à¤µà¥€ तथा जल हैं।
अंगूठा जो आग का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करता है और तीसरी उंगली जो अंतरिकà¥à¤· का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करती है, से शà¥à¤°à¥‚ करें। à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि जब à¤à¤• ततà¥à¤µ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करने वाली à¤à¤• विशेष उंगली अंगूठे के संपरà¥à¤• में आती है जो कि अगà¥à¤¨à¤¿ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करता है, तो à¤à¤• चारà¥à¤œ (आवेश) उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है जो उस विशेष ततà¥à¤µ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है।
शà¥à¤¨à¥à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ की टिनिटस, (Tinnitus) वरà¥à¤Ÿà¤¿à¤—ो (Vertigo) और बेहतर समगà¥à¤° शà¥à¤°à¤µà¤£ शकà¥à¤¤à¤¿ के लिठदृढ़ता से अनà¥à¤¶à¤‚सा की जाती है। इसका अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ हर दिन 30 से 45 मिनट के लिठकिया जाना चाहिà¤à¥¤
शà¥à¤¨à¥à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ के लिठआसान कदम।
पदà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¨ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में बैठें। सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि आप आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आप कम से कम 30 मिनट तक बैठे रहेंगे।
बीच की उंगली को मोड़ें और अंगूठे को बीच की उंगली पर लाà¤à¤‚।
अंगूठे को धीरे धीरे दबायें जब तक कि बीच की ऊà¤à¤—ली अंगूठे के आधार को न छूने लगे।
ऊà¤à¤—ली को सही जगह रखने के लिठअंगूठे पर थोड़ा दबाव डालना चाहिà¤à¥¤
इस मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ का लाठयह है कि यह दिन के किसी à¤à¥€ समय किया जा सकता है। यदि इसे लगातार 30 से 40 मिनट तक करना संà¤à¤µ नहीं है, तो यह दिन में 15 मिनट 3 बार किया जा सकता है।
लगातार बढ़ते तनाव और शोर, कà¥à¤› बहरेपन के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण हैं, कान के लिठयोग का सामानà¥à¤¯ दिनचरà¥à¤¯à¤¾ के रूप में अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिà¤à¥¤ आमतौर पर लोग बीमार पड़ने के बाद शà¥à¤°à¥‚ करते हैं। इसे करने के लिठबीमारी की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•à¥à¤·à¤¾ नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ योग आपके शारीरिक हावà¤à¤¾à¤µ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करेगा, आपकी ऊरà¥à¤œà¤¾ को बढ़ावा देगा और जीवन की चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना करने के लिठमानसिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करेगा।
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